डॉ कल्ला ने किए गणेश दर्शन, प्रदेश में अमन चैन की कामना

बीकानेर। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री डॉ बी डी कल्ला ने सोमवार को रत्ताणी व्यासों की बगीची में अपनी धर्म पत्नी श्रीमती शिव कुमारी कल्ला के साथ भगवान श्रीगणेश जी की पूजा-अर्जचा की और सभी की खुशहाली की प्रार्थना की।
डॉ कल्ला ने गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व देश में साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसा माना जाता है कि तत्कालीन बड़ौदा राज्य में एक प्रसिद्ध पहलवान जुम्मा दादा ने राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1901 में अपने Óअखाड़ेÓ से गणेश उत्सव की शुरुआत की थी।

वे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से प्रभावित थे। तिलक ने उन्हें मंदिर में गणेश उत्सव शुरू करने के लिए प्रेरित किया। सार्वजनिक गणेश उत्सव के माध्यम से युवाओं को देश की संस्कृति से जुडऩे का अवसर मिला, साथ ही उनमें देशभक्ति की भावना के जरिए

आपस में जुडऩे का अवसर मिला। डॉ कल्ला ने नगर वासियों को इस पावन दिन की बधाई देते हुए देश प्रदेश में अमन चैन की प्रार्थना की।
मोहता धर्मधाला श्रीगणेश मंदिर में दर्शन किए- ऊर्जा मंत्री डॉ बीडी कल्ला ने मोहता धर्मशाला व मोहता रसायन शाला में स्थित गणेश मंदिर में भगवान श्री गणेश के दर्शन किए और पूजा अर्चना की। उन्होंने मोहता रसायन शाला में भी बनाई जा रही दवाओं की जानकारी ली और कहा कि आयुर्वेद में समस्त रोगों को बिना किसी दुष्प्रभाव के ठीक करने की क्षमता है। सनातन धर्म ग्रंथों में भी आयुर्वेद की महता को स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बदलती जीवन शैली में आयुर्वेद और अधिक उपयोगी सिद्ध हो सकेगा। आमजन में इस चिकित्सा पद्धति को और अधिक लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता है।


इस अवसर पर मोहता रसायन शाला के प्रबंधकों ने धर्मशाला के सामने की सड़क पर रेहड़ी वालों द्वारा किए गए कब्जे व अतिक्रमण की शिकायत की। इस पर डॉ कल्ला ने कोटगेट थानाप्रभारी धरम पूनिया को निर्देश दिए कि सड़क पर नॉन वेंडिंग जोन के सम्बंध में स्पष्ट लिखा जाए ताकि यहां पर अतिक्रमण न हो।

डॉ.कल्ला ने आदिनाथ भगवान के मंदिर में चैत्य परिपाटी के तहत किए दर्शन-ऊर्जा मंत्री डॉ.बुलाकी दास कल्ला ने सोमवार को नाहटा चैक के आदिनाथ भगवान के मंदिर में जैन श्रावक-श्राविकाओं के साथ चैत्य परिपाटी के तहत दर्शन किए तथा कहा कि पर्युषण और संवत्सरि पर्व को जैनधर्म का अनुकरणीय पर्व है। इस पर्व से सभी जाति, वर्ग व समुदाय को प्रेरणा लेकर आपसी कटुता, वैमन्स्य को त्यागकर सद््भाव व स्नेह तथा आत्मीय भाव से रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जैन धर्म के 24 तीर्थंकर भगवान महावीर ने सत्य, अहिंसा, अचैर्य, अपरिग्रह व ब्रह्मचर्य आदि सिद्धान्त युगों-युगों तक सर्व समाज के लिए प्रेरणादायक रहेंगे। भगवान महावीर के सिद्धान्त धार्मिक-आध्यात्मिक के साथ वैज्ञानिक और चराचर प्राणियों की रक्षा, मन, वचन व काया की शुद्धि के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने साध्वीवृृंद से महामांगलिक पाठ सुनकर आशीर्वाद लिया।

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