खेल कोटे से चयनित शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की हो जांच

जिला परिषदों की ओर से की

गई थी स्पोट्र्स कोटे में शिक्षक भर्ती

बीकानेर। गत वर्ष जिला परिषदों की ओर से स्पोट्र्स कोटे से की गई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने लगे हैं। चयन प्रक्रिया से बाहर हुए कई अभ्यर्थियों ने चयनितों के राष्ट्रीय स्तर के प्रमाण-पत्रों को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि जिला स्तर व राज्य स्तर पर खेले बिना कई अभ्यर्थी नेशनल स्तर के उन खेलों के प्रमाण-पत्र लाए, जिन्हें उनके गृह जिलों में लोगों को पता तक नहीं है। आरोप यह भी है कि जिला स्तर व राज्य स्तर पर उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन करने वाले खिलाडिय़ों को इस भर्ती से बाहर कर दिया गया, जबकि जिला स्तर व राज्य स्तर पर अलग-अलग खेल व नेशनल पर अलग खेल में प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने वालों का चयन कर दिया गया। इस संबंध में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक से शिकायत कर चयनित अभ्यर्थियों के जिला स्तर से लेकर नेशनल स्तर तक के सभी प्रमाण-पत्रों की जांच करवाने की मांग की गई है।

आरोपों में कितनी सच्चाई

शिकायत में आरोप है कि चयनितों के प्रमाण-पत्र फर्जी है। उन्होंने बिना जिला स्तर पर खेले सीधे राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी प्रतियोगिताओं के प्रमाण-पत्र हासिल किए, जिनकी जिले की टीम ही नहीं थी। यह भी आरोप है कि कई ऐसे खेल है, जिनके प्रति खिलाडिय़ों में जागरूकता नहीं होने के कारण कुछेक खिलाड़ी ही भाग लेते हैं और सीधे नेशनल पहुंचकर प्रमाण-पत्र हासिल कर लेते हैं।
खेल संघ के पदाधिकारी करे जांच
जिला परिषद के माध्यम से प्रदेशभर में खेल कोटे से की गई शिक्षकों की भर्ती में चयनितों के प्रमाण-पत्रों की जांच खेल संघों के पदाधिकारियों से करवाई जाए, साथ ही चयनितों की दक्षता की भी जांच की जाए कि कहीं उसने बिना खेले प्रमाण-पत्र तो हासिल नहीं कर लिए।

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