बीकानेर। हिंदी पंचांग के अनुसार, वर्ष में चार नवरात्रि मनाई जाती है। इनमें दो गुप्त नवरात्रि क्रमशः माघ और आषाढ़ में मनाई जाती है। वहीं, दूसरी नवरात्रि चैत्र और चौथी नवरात्रि अश्विन में मनाई जाती है। इस वर्ष माघ गुप्त नवरात्रि 2 फरवरी से प्रारंभ होकर 10 फरवरी को समाप्त होगी। गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में दस महाविद्याओं की देवियों की पूजा-उपासना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में अपनी मनोकामनाएं गुप्त रखनी चाहिए। व्रत उपवास के कई कठोर नियम भी हैं। इनका पालन करना अनिवार्य है। आइए, माघ गुप्त नवरात्रि के बारे में सब कुछ जानते हैं

गुप्त नवरात्रि तिथि

हिंदी पंचांग के अनुसार, माघी नवरात्रि 2 फरवरी को शुरू होगी और 10 फरवरी को समाप्त होगी। वहीं, घटस्थापना की तिथि प्रातः काल 7 बजकर 9 मिनट से लेकर 8 बजकर 31 मिनट तक है। इस दौरान कलश स्थापना कर पूजा कर सकते हैं। साथ ही पूजा संकल्प ले सकते हैं।

-2 फरवरी को घटस्थापना और द्वितीया है। इस मां शैलपुत्री और ब्रह्मचारणी की पूजा की जाएगी।

-3 फरवरी को तृतीया है। इस दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाएगी।

-4 फरवरी को चतुर्थी है। इस दिन मां दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाएगी।

-5 फरवरी को पंचमी है। इस दिन मां दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा की जाएगी।

-6 फरवरी को षष्ठी है। इस दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाएगी।

-6 फरवरी को सप्तमी है। इस दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाएगी।

-7 फरवरी को सप्तमी है। इस दिन मां दुर्गा के काली स्वरूप की पूजा की जाएगी।

-8 फरवरी को अष्टमी है। इस दिन मां दुर्गा के महा गौरी स्वरूप की पूजा की जाएगी।

-9 फरवरी को नवमी है। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाएगी।

व्रत विधि

घटस्थापना के दिन स्नान-ध्यान से निवृत होकर पवित्र धारण कर व्रत संकल्प लें। इसके लिए सबसे पहले आमचन करें। इसके पश्चात मां शैलपुत्री की पूजा फल, फूल, धूप-दीप, कुमकुम, अक्षत आदि से करें। मां को लाल पुष्प अति प्रिय है। अत: मां को लाल पुष्प जरूर भेंट करें। इससे व्रती सभी रोगों से मुक्त रहता है। ऐसा कहा जाता है कि मां शैलपुत्री को गाय का घी अर्पित करने से घर में सुख-शांति और मंगल का आगमन होता है। माता शैलपुत्री का आह्वान निम्न मंत्र से करें-

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

इसके पश्चात मां की आरती कर उनसे परिवार के मंगल की कामना करें। दिन भर उपवास रखें। आप चाहें तो एक फल और एक बार जल ग्रहण कर सकते हैं। शाम में आरती-अर्चना करने के बाद फलाहार कर सकते हैं।

महत्त्व
पं श्रवण व्यास बताते है कि गुप्त नवरात्रों का बड़ा ही महत्त्व बताया गया है। मानव के समस्त रोग-दोष व कष्टों के निवारण के लिए गुप्त नवरात्र से बढ़कर कोई साधना काल नहीं हैं। श्री, वर्चस्व, आयु, आरोग्य और धन प्राप्ति के साथ ही शत्रु संहार के लिए गुप्त नवरात्र में अनेक प्रकार के अनुष्ठान व व्रत-उपवास के विधान शास्त्रों में मिलते हैं। इन अनुष्ठानों के प्रभाव से मानव को सहज ही सुख व अक्षय ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। दुर्गावरिवस्या नामक ग्रंथ में स्पष्ट लिखा है कि साल में दो बार आने वाले गुप्त नवरात्रों में भी माघ में पडऩे वाले गुप्त नवरात्र मानव को न केवल आध्यात्मिक बल ही प्रदान करते हैं, बल्कि इन दिनों में संयम-नियम व श्रद्धा के साथ माता दुर्गा की उपासना करने वाले व्यक्ति को अनेक सुख व साम्राज्य भी प्राप्त होते हैं। शिवसंहिता के अनुसार ये नवरात्र भगवान शंकर और आदिशक्ति मां पार्वती की उपासना के लिए भी श्रेष्ठ हैं। गुप्त नवरात्रों को सफलतापूर्वक संपन्न करने से कई बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।