परीक्षा में पूछा, किसकी सरकार में हुए थे गुजरात दंगे?, पेपर सेट करने वाले पर होगी कार्रवाई

नई दिल्ली। CBSE ने 12वीं कक्षा के पहले टर्म की परीक्षा में एक ऐसा सवाल पूछ लिया, जिसके बाद उसम माफी मांगनी पड़ गई। समाजशात्र विषय की परीक्षा में सवाल पूछा गया था कि ‘गुजरात में साल 2002 में मुस्लिम विरोधी हिंसा किस सरकार के शासनकाल में हुई थी?’ कुछ ही घंटों के बाद बोर्ड ने माफी मांगी और कहा कि यह सवाल ग़लत तरीके से पूछा गया है। बोर्ड ने जिम्मेदार व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई करने के आश्वासन भी दिया है।

इस सवाल के जवाब के लिए सीबीएसई ने चार विकल्प दिए थे। इसमें ‘कांग्रेस’, ‘भाजपा’, ‘डेमोक्रेटिक’ और ‘रिपब्लिकन’ शामिल थे। सफाई देते हुए सीबीएसई ने ट्विटर पर पोस्ट डालकर कहा, ‘आज कक्षा 12 के समाजशास्त्र टर्म 1 की परीक्षा में एक सवाल पूछा गया था जो कि गलत था और यह सीबीएसई के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाला था। सीबीएसई ने इस गलती की पहचान कर ली है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’

दूसरे ट्वीट में बोर्ड ने कहा, ‘पेपर सेट करने वालों के लिए सीबीएसई की गाइडलाइन स्पष्ट कहती है कि सवाल शिक्षा से जुड़े होने चाहिए। ऐसे राजनीतिक सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए जो कि लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाएं।’ बोर्ड ने यह स्पष्ट तो नहीं कहा कि किस सवाल को लेकर यह बात कही गई है लेकिन सीबीएसई के अधिकारियों के मुताबिक यह वही प्रश्न था जिसमें गुजरात दंगों से जुड़ा सवाल पूछा गया था।

NCERT की कक्षा 12 की समाजशास्त्र की किताब के ‘सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियां’ अध्याय से इस सवाल को पूछा गया था। किताब के पेज नंबर 134 पर लिखा गया है, ‘कोई भी क्षेत्र सांप्रदायिक हिंसा से अछूता नहीं रह पाया। सभी समुदायों को कभी न कभी कम या ज्यादा इस तरह की हिंसा का सामना करना पड़ा है। अल्पसंख्यक समुदाय इससे ज्यादा ही प्रभावित होता रहा है। इस मामले में शासन करने वाली राजनीतिक पार्टी को एकदम से अलग नहीं रखा जा सकता।’

इसी अध्याय में आगे कहा गया है कि कि जो दो सबसे बड़े दंगे हुए वे सबसे बड़ी पार्टियों के शासनकाल में ही हुए। पहला सिख दंगा 1984 और दूसरा 2002 का गुजरात दंगा।

कैसे सेट होता है पेपर?
दरअसल सीबीएसई कोई भी पेपर सेट करने के लिए दो पैनल बनाती है। इसमें पेपर सेटर और मॉडरेटर होते हैं। एक्सपर्ट्स की पहचान को छिपाकर रखा जाता है। पेपर सेटर यह नहीं जानते हैं कि उनके सवाल को मेन पेपर में शामिल किया जाएगा या नहीं। बाद में मॉडरेटर प्रश्नपत्र की समीक्षा करते हैं औऱ यह देखते हैं कि सिलेबस से ही सवाल पूछा गया है या नहीं।

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