बीकानेर में यहां होती है माँ दुर्गा की अनूठी पूजा, देखिए

बीकानेर। पूरे देशभर में नवरात्रा को लेकर की धूम मची हुई है। मन्दिर , मोहहले से लेकर घर-घर में मा दुर्गा का पंडाल लगाकर लोग पूजा अर्चना कर रहे है मगर बीकानेर में एक ऐसी जगह है जहां पवित्र स्थान, नदियों, तालाबों से मिट्टी लाकर प्रतिदिन मा दुर्गा की 108 पार्थिव मूर्ति का निर्माण कर रहे हैं इतना ही पंडित द्वारा विधि विधान से मंत्रोच्चार द्वारा मां का आह्वाहन कर प्रतिमा को नदी व तलाबों में प्रवाहित करेंगे ताकि पर्यावरण को भी नुकसान ना हो।

अबतक आपने भगवान गणेश , शिव के पार्थिव शिवलिंग बनते देखे होंगे मगर बीकानेर शहर के परकोटे में एक ऐसी जगह है जहां प्रतिदिन 108 मा दुर्गा के पार्थिव मूर्ति का निर्माण किया जाता है। शारदीय नवरात्रा से शुरू होने वाले पर्व के 9 दिन तक मां दुर्गा का पार्थिव बनाया जाता है। बीकानेर के डागा चोक में पंडित अशोक रंगा द्वारा विधि विधान से पिछले कई वर्षों से मा दुर्गा के पार्थिव प्रतिमा का निर्माण करवाया जा रहा है।

दरअसल बीकानेर को छोटी काशी यू ही नही कहा जाता। यह देशभर में होने वाले सभी धार्मिक पर्वो को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। जिस प्रकार बंगाल में बड़ी धूमधाम से दुर्गा महोत्सव मनाया जा रहा है ठीक उसी तरह बीकानेर में भी भक्त हर्षोल्लास से मा दुर्गा की पुजा अर्चना करते है। 9 दिन तक चलने वाले इस पर्व में 1 हजार 8 मां दुर्गा की पार्थिव प्रतिमा पूरे विधि विधान से प्रत्येक पार्थिव को मंत्रोचार द्वारा तैयार किया जाता है। उसके बाद उस पर अक्षत लगाकर अलग-अलग श्रृंगार से सुशोभित किया जाता है। उन्हें इस तरह सजाया जाता है कि शाम होते होते वह किसी विशेष धार्मिक स्थान पर बनी मूर्ति का स्वरूप ले लेते हैं। इस पार्थिव निर्माण के लिए तैयारियां कई महीने पूर्व शुरू की जाती है। बीकानेर जिले के आसपास पवित्र सरोवर की मिट्टी, बिल्वपत्र की जड़, बड़ की जड़, व पीपल की छाल सहित औषधीय पौधों को मुहूर्त के अनुसार एकत्रित किया जाता है। उसके बाद शारदीय नवरात्रा पहले दिन विधि विधान से सभी वस्तुओं का मंत्रोचार द्वारा पूजा अर्चना कर उनका शुद्धिकरण किया जाता है। उसके बाद सभी को आपस में गुदकर प्रतिमा के लिए मिट्टी का निर्माण किया जाता है।

यज्ञाचार्य पंडित अशोक रंगा ने बताया कि मां दुर्गा के पार्थिव प्रतिमा के निर्माण को लेकर शारदीय नवरात्रा का एक अपना विशेष साधना है। इसके लिए अलग-अलग स्थानों से मिट्टी व औषधीय पौधों की मिट्टी को मिलाया जाता है साथ ही प्रत्येक पार्थिव निर्माण पर चार बार मां दुर्गा का जाप किया जाता है। करीब सवा लाख मां दुर्गा का जाप करते है। इस बार विश्व में फैली कोरोना महामारी से मुक्ति के लिए मां दुर्गा को अरदास की जा रही है कि जल्द ही पूरा विश्व इस महामारी से मुक्त हो। कहते हैं भक्ति में शक्ति है और चैत्र मास पर हर भक्त मां दुर्गा को अपनी अपनी तरह की पूजा पाठ कर उन्हें खुश करने की कोशिश कर रहा है लेकिन सब का उद्देश्य एक है कि विश्व में शांति हो आपसी भाईचारा हो और और कोरोना की फैली इस महामारी से सभी को मुक्ति मिले।

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