स्कूली किताबों के पहले पन्ने पर छपेगी संविधान की प्रस्तावना, सरकारी व निजी स्कूलों के स्टूडेंट्स के लिए हो रही वर्कबुक तैयार

जयपुर। राजस्थान में स्कूली किताबों के पहले पन्ने पर संविधान की प्रस्तावना छापी जाएगी। आगामी नए शिक्षा सत्र के लिए किताबों का छपना शुरू हो गया है। कुछ समय पहले राज्यपाल कलराज मिश्र की पहल पर प्रदेश के सभी यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाले समारोह में संविधान की प्रस्तावना और मूल कवियों का वाचन कराना अनिवार्य किया गया है। कलराज मिश्र ने यूनिवर्सिटी में कुलगीत व राष्ट्रगान भी अनिवार्य किया। राज्यपाल कलराज मिश्र की इस पहल को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्कूली किताबों के पहले पन्ने पर संविधान की प्रस्तावना छापने के निर्देश दिए थे। उधर, राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग ने कक्षा दो से आठवीं तक के स्टूडेंट्स का सिलेबस कम करके शेष रहे पाठ व हटाए गए पाठ को सार्वजिक कर दिया है।

वहीं, शिक्षा विभाग ने एक बार फिर प्रदेश के स्कूल खोलने के संकेत दिए हैं। दरअसल, सिलेबस से हटाए गए पाठ्क्रम में शिक्षा विभाग ने प्रस्तावित कालांश की चर्चा की है। कालांश का मतलब पीरियड तभी लगाए जा सकेंगे, जब स्कूल फिर से शुरू होंगे। ऐसे में माना जा रहा कि सरकार स्कूल फिर से खोलने की मंशा रख रही है। इस बीच, राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एसआइइआरटी) की वेबसाइट पर नया सिलेबस दिया गया है, जिससे स्टूडेंट्स व स्कूल संचालक डाउनलोड़ कर सकेंगे। कक्षा दो से आठ तक के स्टूडेंट्स के लिए विषयवार सूची जारी की है, जिसमें प्रत्येक पाठ की चर्चा करते हुए बताया गया कि यह पाठ्क्रम से हटाया गया है या नहीं। अगर नहीं हटाया गया तो उसके लिए कितने कालांश लेंगे। शिक्षा विभाग नए शिक्षा सत्र को शुरू करने को लेकर तैयारी में जुटा है, ताकि बच्चों की पढ़ाई ना बाधित हो। विभाग ने एक वर्कबुक भी तैयार की है। यह वर्कबुक सरकारी व निजी स्कूलों के स्टूडेंट्स को दी जाएगी। प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के संकट के बीच वर्कबुक तैयार हो रही है।

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