कुलपति ने कलक्टर को भी नहीं दी रिपोर्ट

बीकानेर। बीकानेर इंजिनियरिंग कॉलेज जब से बना है तब से हमेशा विवादों में रही है कभी स्टाफ भर्ती को लेकर तो कभी कर्मचारियों को निकालने को लेकर कॉलेज की छवि खराब होती जा रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान बीकानेर इंजिनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य द्वारा आचार संहिता का उल्लघंन करते हुए करोड़ों रुपये के शैक्षणिक कर्मचारियों को सीएएस का लाभ दिये जाने की शिकायत एडवोकेट सुरेश कुमार गोस्वामी ने जिला कलक्टर बीकानेर को की। इसकी जांच की गई तो इसमें प्रथम दृष्टया तत्कालीन प्राचार्य ए.के.गुप्ता को दोषी मानते हुए प्रारंभिक जांच दी गई। प्रारंभिक जांच के आधार पर एच.डी.चारण कुलपति तकनीकी विश्वविद्यालय बीकानेर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच अधिकारी द्वारा 14 दिस. को जांच कमेटी द्वारा जांच की गई। इस पर सुरेश गोस्वामी ने जांच रिपोर्ट लेने के लिए संयुक्त सचिव तकनीकी शिक्षा राजस्थान सरकार व तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति से पत्रवार कर कई बार जांच रिपोर्ट की प्रतिलिपी मांगी लेकिन आज तक नहीं दी गई। इस पर सुरेश गोस्वामी ने जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला कलक्टर को पत्र दिया तो कलक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 14 जनवरी को रजिस्ट्रार बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय बीकानेर को अतिमहत्वपूर्ण पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय भिजवाने के निर्देश दिये। लेकिन तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति ने 18 जनवरी को जिला कलक्टर बीकानेर को पत्र देकर सूचना दी कि जांच रिपोर्ट मूल ही सीलबंद लिफाफे में संयुक्त सचिव तकनीकी शिक्षा शासन सचिवालय जयपुर को भेजी जा चुकी है। जिसकी कोई प्रति तकनीकी विश्वविद्यालय बीकानेर में रक्षित नहीं है।
आचार संहिता का खुला उल्लघंन
प्राचार्य द्वारा दिये गये लाभ
शैक्षणिक कर्मचारियों को आचार संहिता के दौरान बीकानेर इंजिनियरिंग कॉले के प्राचार्य ए.के.गुप्ता द्वारा करोड़ों रुपये के सीएएस का लाभ जिन 73 शैक्षणिक कर्मचारियों को लाभ दिया गया है उनके विरुद्व न्यायालय मे ंमामला लंबित है तथा 3 साल के कॉन्टेक्ट पर नियुक्त कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय 10 अप्रेल 2006 के बाद न्यायालय के आदेश का उल्लघंन करते हुए 24 दिस. 2016 को अपने स्थाई नियुक्ति आदेश जारी कर लिये। जबकि न्यायालय ने अपनी 5 सदस्य पीठ में यह निर्णय दिया था कि कॉन्ट्रेक्ट वर्कचार्ज व अन्य अनियमित भर्तियों को नियमित नहीं किया जायेगा। बीकानेर न्यायालय में परिवादी के समस्त तथ्य एवं दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए थानाधिकारी बीछवाल को सीआरपीसी 202 में जांच हेतु भेजा जा चुका है।

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