उपचुनाव : बगावत कहीं बीजेपी को ना पहुंचा दे नुकसान

प्रदेशाध्यक्ष राठौड़ बोले, एकजुट हैं हम, संगठित होकर लड़ेंगे चुनाव

DV NEWS, बीकानेर। उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज हुए भाजपा नेताओं के बागी तेवर सामने आने लगे हैं। हालांकि भजनलाल सरकार के मंत्री बीजेपी के बागी नेताओं को समझाने में लगे हुए हैं। लेकिन इस बगावत को देखते हुए सियासी गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि ये बगावत कहीं भाजपा को नुकसान ना पहुंचा दे।

प्रदेश में सात विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में भाजपा के प्रत्याशी घोषित होने के साथ ही 5 सीटों पर असंतोष के साथ ही बगावत भी सामने आ गई है। झुंझुनूं, सलूम्बर, रामगढ़, देवली-उनियारा में बगावत बाहर आकर अपना रूप दिखा रही है। वहीं दौसा में असंतोष व्याप्त होता दिख रहा है।
झुंझुंनूं में वर्ष, 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार रहे बबलू चौधरी, रामगढ़ से जय आहूजा ने बगावत कर रखी है। वहीं देवली- उनियारा विधानसभा क्षेत्र में वर्ष, 2023 में उम्मीदवार रहे विजय बैंसला के समर्थक भी नए प्रत्याशी का विरोध कर रहे हैं। सलूम्बर में पार्टी उम्मीदवार का विरोध करने वाले दावेदार नरेंद्र मीणा को कल यानी सोमवार को पूर्व मंत्री श्रीचंद कृपलानी विशेष चार्टर विमान से लेकर जयपुर आए थे।
वहीं जय आहूजा को समझाने के लिए गृह राज्य मंत्री जवाहर बेढम, सहकारिता मंत्री गौतम दक, डिप्टी मेयर पुनीत कर्नावट गए हैं। सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत झुंझुनूं में बबलू चौधरी को मनाने गए हैं।

मंत्री जवाहर बेढम व अन्य नेता जय आहूजा के गिले-शिकवे दूर करने में सफल रहे हैं। जय आहूजा ने कहा है कि वह पार्टी प्रत्याशी सुखवंत सिंह के समर्थन में प्रचार करेंगे।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने उपचुनाव में बगावत को लेकर कहा है कि कहीं भी किसी तरह की बगावत नहीं है, कोई बागी नहीं है। हमारी पार्टी एकजुट रहेगी और संगठित होकर चुनाव लड़ेंगे। नेताओं में एक बार टिकट मिलने की उम्मीद रहती है लेकिन दूसरे को टिकट मिलती है तो थोड़ी बहुत मन में कसक रहती है। कांग्रेस नेताओं की टिप्पणी पर राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस को भय है, उनके बयानों में कमजोरी दिखाई देती है। राठौड़ ने दावा किया है कि हम विकास के आधार पर चुनाव जीतेंगे।

अब यह देखने वाली बात होगी कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का यह विश्वास कि कोई बागी नहीं है, इसका असर भविष्य में दिखाई देगा या नहीं? मंत्रियों की समझाइश कितनी कारगर साबित होती है? बागी बैठते हैं या फिर प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव में जुटते हैं? यदि समर्थन में बैठ गए लेकिन मन से चुनाव में नहीं जुटे तो भी भाजपा को नुकसान हो सकता है।

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