बीकानेर : सुनहरे धोरों में उगेंगे गुलाबी मोती, बनेगा किसानों की आय का नया रास्ता

बीकानेर। कृषि क्षेत्र में नवाचार करने वाले स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय ने बीकानेर जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में ड्रेगन फ्रूट उगाने के लिए प्रोजेक्ट बनाकर राज्य सरकार को भेजा है। स्वीकृति मिलते ही विवि 2 बीघा पर खेती करेगा। प्रोजेक्ट सफल रहा तो मरुस्थलीय क्षेत्र के किसानों को नई फसल की राह मिलेगी।

अभी केवल यहां उगता है ड्रेगन फ्रूट

दुनिया- मलेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस, संयुक्त राज्य अमेरिका और वियतनाम।

देश- कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, प. बंगाल, आंध्र, अंडमान-निकोबार।

फायदा: 1 पौधे पर 7-8 किलो फल, नग की दर से बिकेगा

  • 1 पौधे पर 7-8 किलो फल होते हैं। एक किलो में 4-5 फ्रूट आते हैं। ये फल नग से बिकते हैं, जो किसानों के लिए लाभकारी।
  • पौधे की ऊंचाई 5 फीट, तोड़नें में आसानी।
  • पौधे की उम्र 15 साल होती है।

इस फल की खेती और खासियत

  • एक बार पौधा लगा लिया तो दोबारा मंगवाने की जरूरत नहीं। पौधे उसी के तने की कलम से तैयार होते हैं।
  • दो बार बुवाई होती है साल में। पहली फरवरी-मार्च, दूसरी जुलाई-अगस्त में। फल नवंबर-दिसंबर में आते हैं।

कृषि विवि के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्रसिंह राठौड़ कहते हैं, भारत में इसकी खेती 1992 में शुरू हुई।

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