बीकानेर : लम्पी से 50 हजार गायों की मौत. इस पर हमारे विधायकों के पास कोई सवाल नहीं, पढ़े खबर

बीकानेर, लम्पी का प्रकोप सबसे ज्यादा बीकानेर में है। सरकारी आंकड़ों में संभाग के चार जिलों में 15 हजार गायों की मौत हो चुकी है। जबकि बीकानेर जिले में सर्वाधिक 50 हजार गायें मर चुकी हैं। इस बीच 19 सितंबर से विधानसभा सत्र की अगली बैठक शुरू हो रही है। ऐसे में संभाग के विधायकों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा लम्पी से मरती गायों की स्थिति और पशुपालकों का दर्द होना चाहिए। इससे इतर संभाग के 11 विधायकों के जाे 12 प्रश्न सूची में शामिल हुए हैं उनमें एक भी गायों की मौत से जुड़ा नहीं है। इस दौर में गायों की मौत का सवाल शामिल नहीं होना हैरान करता है। वह भी तब जबकि बीकानेर संभाग के विधायकों के सवालों में सिरोही में न्यायालय भवन निर्माण की प्रगति और कुचामन तहसील के गांव में अतिक्रमण से जुड़े सवाल तक शामिल हैं। हालांकि इससे इतर एक स्थिति यह भी है कि संभाग के 24 में से 11 विधायक कांग्रेस के हैं। इनमें से तीन मंत्री बन चुके हैं जो सदन में सवाल उठाते नहीं वरन जवाब देते हैं। ऐसे में कांग्रेस के आठ विधायक ही सवाल उठाने में सक्षम हैं। दूसरी ओर भाजपा के 10 में से पांच विधायकों के सवाल का कोटा पूरा हो चुका है। माकपा के गिरधारी महिया भी अपने हिस्से के सवाल पूछ चुके हैं। इसके बावजूद 20 विधायकों के लिहाज से 2000 सवालों का कोटा होता है। अब तक 1082 सवाल सूचीबद्ध हुए हैं। मतलब यह कि हमारे माननीयों के पास अब भी 918 सवाल पड़े हैं।

24 विधायक संभाग में, 3 मंत्री, 21 को सवाल पूछने का अधिकार
6 का कोटा पूरा, 14 के पास 918 सवाल बाकी, 11 के 12 प्रश्न सूचीबद्ध, 1 भी सवाल लम्पी और गायों की मौत पर नहीं

भाजपा के इन विधायकों के
पास बचे हैं सवाल

सिद्धी कुमारी, अभिनेष महर्षि, बलबीर लूथरा, गुरदीपसिंह और धर्मेन्द्रकुमार के खाते में अब भी काफी सवाल है। विधायक महर्षि कहते हैं, गायों की मौत पर सवाल भेजा लेकिन सूची में नहीं आया।
इनके सवाल खत्म : राजेन्द्र राठौड़, सुमित गोदारा, बिहारीलाल बिश्नोई, श्रीमती संतोष, रामप्रताप कासनिया। बिश्नोई कहते हैं, अन्य प्रावधानों से मुद्दा उठाएंगे।

अब बात रखने के ये उपाय
प्रश्नकाल: 
हालांकि लंपी पर बीकानेर के विधायकों का प्रश्न नहीं है लेकिन इस मुद्दे पर प्रदेश से जुड़ा तारांकित प्रश्न सदन में आता है तो पूरक के रूप में मिल सकता है मौका।
स्थगन: कार्यवाही रोकर स्थगन पर चर्चा न भी हो तब भी मुद्दे पर दो मिनट बोलने की मंजूरी मिल सकती है।
नियम 295: इसमें अवसर मिलने पर विशेष उल्लेख के रूप में रख सकते हैं अपनी बात।

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