अंतर्राष्ट्रीय ऊंट उत्सव में साकार हुई बहुरंगी संस्कृति

बीकानेर । बीकानेर के डॉ करणी सिंह स्टेडियम में शनिवार को भारत की रंग-बिरंगी संस्कृति का साकार रूप देखने को मिला। देश के विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने भंगड़ा,गेर आदि लोकनृत्यों और मशक, भपंग, बीन, अलगोजा एवं खड़ताल जैसे लोक वाद्यों की मधुर स्वरलहरियों से वातावरण को सुमधुर कर दिया। अवसर था २६ वें अंतर्राष्ट्रीय ऊंट उत्सव के शुभारम्भ समारोह का। जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने शांति का प्रतीक सफेद कपोत और रंग-बिरंगे गुब्बारे हवा में छोड़कर उत्सव का विधिवत शुभारम्भ किया।
भव्य शोभायात्रा से हुआ आगाज
इससे पहले जूनागढ़ के आगे से भव्य एवं आकर्षक शोभायात्रा निकली। जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने हरी झण्डी दिखाकर शाह लवाजमे जैसी वेशभूषा पहने रोबिलों की अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव की शोभायात्रा को रवाना किया। लोक वाद्य यंत्रों और संगीत पर थिरकते राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने शोभायात्रा की ओर से हर किसी को आकर्षित किया। शोभायात्रा यहां से डॉ. करणीसिंह स्टेडियम तक पहुंची। शोभायात्रा में सजे-धजे ऊंटों पर पारम्परिक वेशभूषा में रोबीले, सिर पर मंगल क लश लिए हुए महिलाएं, तांगों पर राजस्थानी वेशभूषा में सवार विदेशी सैलानी, आमजन के आकर्षण का केन्द्र बने हुए थे। ये विदेशी पर्यटक खम्मा घणी , पगेलागणा्य और नमस्ते्य जैसे अभिवादन के साथ सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रहे थे।
स्टेडियम में साकार हुई बहुरंगी संस्कृति
शोभायात्रा में शामिल विभिन्न राज्यों के कलाकारों के डॉ करणीसिंह स्टेडियम में पहुंचने के साथ ही भारत की अनूठी अनेकता में एक ता की संस्कृति का साकार रूप देखने को मिला। सुसज्जित ऊंटों पर सवार रोबीलों से शुरू हुआ काफिला देखकर पर्यटकों ने तालियों की गडगड़़ाहट के साथ इसका स्वागत किया। साथ ही विभिन्न लोक कलाकारों ने मशक, खड़ताल, भपंग, बीन आदि लोकवाद्यों की मीठी धुनों से क ानों में रस घोला।
आर्मी के बेग पाइपर बैंड ने बांधा समा
भारतीय सेना के आर्मी बैंड ने आकर्षण वेशभूषा, कदमताल के साथ बेगपाइपर, ढोल और अन्य वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी के साथ दर्शकों को रोमांचित किया। लगभग पंद्रह मिनट तक बैंड वादकों की प्रभावमयी प्रस्तुति ने सभी दर्शकों को बांध के रखा। भटिंडा बैंड वादकों ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
आकर्षण का केन्द्र रहे सजे-धजे ऊंट
विभिन्न राजस्थानी आभूषणों एवं रंग-बिरंगे वस्त्रों से सजे-धजे ऊंट आकर्षण का केन्द्र थे तो ऊंटों की आकर्षक फर कटिंग भी आम दर्शक को प्रभावित कर रही थी। एक ऊंट की पीठ पर प्यारा भारत देश महान््य उकेरा गया था तो दूसरे ऊंट की पीठ पर ढोला-मरवण एवं राजस्थानी लोकनृत्यों के दृश्य दर्शाए गए थे। देशी और विदेशी पर्यटकों में इन सभी झांकियों को अपने कैमरों में कैद करने की होड़ सी देखने को मिली। एसबीबीजे द्वारा कैमल बैंक के माध्यम से विदेशी मुद्रा विनिमय काउंटर लगाया गया।
पुष्करणा सावे की झांकी का आकर्षण
शोभायात्रा में बीकानेर शहर की ३५० साल पुरानी परम्परा के प्रतीक पुष्करणा सावा की झांकी भी आकर्षण का केन्द्र रही। रमक-झमक संस्था की ओर से निकाली जाने वाली इस झांकी में पारम्परिक विष्णु रूपी दूल्हा, सावे के गीत गाती महिलाएं, शंख-वादन करते चल रहे थे।संस्था के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा भैंरू ने बताया कि झांकी के माध्यम से सावे के ऐतिहासिकता व परम्परा से पर्यटक रूबरू हुए।

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