सीमांकन के अभाव में बढ़ रहे भूमि विवाद!

राजस्व विभाग के पास पटवारियों का टोटा, वर्षों से अटके पड़े हैं प्रकरण
बीकानेर। जिले में कृषि भ्ूिाम के सीमा ज्ञान के अर्से से लम्बित आवेदनों की फाइलें विवादों को बढ़ावा दे रही हैं। राजस्व विभाग के माध्यम से इन प्रकरणों का निस्तारण होना है लेकिन पटवारियों की कमी के चलते राजस्व तहसीलदार प्रकरणों का समय पर निस्तारण नहीं कर पा रहे हैं। ‘राजस्व शिविर न्याय आपके द्वारÓ कार्यक्रम के दौरान भी सीमांकन के हजारों प्रकरण आए थे, जिनमें से मौके पर नाम मात्र के प्रकरण ही निस्तारित हुए। बाकी प्रकरणों के निस्तारण की रिपोर्ट सकारात्मक बताई जा रही है लेकिन हकीकत में इनका निस्तारण कागजों में ही हुआ है। ऐसे में एक ही प्रकृति के दोहरे प्रकरणों की संख्या भी बढ़ गई है। उपनिवेशन विभाग में तो इससे भी दयनीय स्थिति देखने को मिल रही है। यहां तहसीलदारों के अधिकांश पद खाली पड़े हैं और पटवारियों के भरोसे तहसीलें चल रही है।
राजस्व विभाग की जिले में अनेक तहसीलों में भूमि खसरे में पड़ी है और तरमीम नहीं होने से सीमाकंन के विवाद बढ़ते जा रहे हैं। मौके पर कहीं किसान के पास आवंटित भूमि से अधिक कब्जे में है, तो कोई आवंटित भूमि से आधी पर ही काबिज है। ऐसे में भूमि का सीमा ज्ञान कराने से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
पटवारियों पर काम का बोझ
राजस्व विभाग में भी पटवारियों के अनेक पद रिक्त है। ऐसे में कार्यरत पटवारियों के पास एक से अधिक हलको का कार्यभार होने के कारण सीमाकंन के आवेदनों पर गौर नहीं किया जाता। दूसरी बात यह भी है कि सीमांकन प्रकरणों में आपसी विवाद के चलते पटवारी भी टालमटोल करते हैं। इससे जहां अधिक भूमि पर काबिज किसान लाभ उठा रहा है, वहीं पीडि़त किसान तहसीलों के चक्कर निकाल रहा है।
पोर्टल पर सफेद झूठ
भूमि के सीमाज्ञान के अनेक प्रकरण पोर्टल पर भी दर्ज है, जिनकी राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग होती थी। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद अधिकारियों को लम्बित प्रकरणों के निस्तारण के निर्देश दिए हुए हैं लेकिन पोर्टल पर लम्बित प्रकरणों का अब तक निस्तारण नहीं हुआ है। अधिकांश में निस्तारण
की झूठी रिपोर्ट का वैरीफिकेशन नहीं होने से परिवादियों को राहत नहीं मिल पाई है।

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