राजस्थान की मायड़ भाषा को तुरन्त राजभाष घोषित करें

देवेन्द्रवाणी न्यूज, बीकानेर। राजस्थानी मोटयार परिषद द्वारा राजस्थानी भाषा को राजभाषा घोषित किये जाने कि मांग को लेकर पैदल मार्च निकाला शिविरलाईन स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थल से रवाना हुआ। मोटयार परिषद के पैदल मार्च में कैलाश जनागल, रामअवतार उपाध्याय, भरतदान चारण, सुरेन्द्र सिंह, भावना, अनु, कल्पना, अयज कंवर, शारदा बिश्राई, दीपक प्रजापत, राजु नाथ, मघराज, जगदीश, विशाल, कुलदीप सहित युवा व छात्र ने हाथों में तकतिया ले रखी थी जिनमें राजस्थानी भाषा की मांग को लेकर कई तरह श्लोगन लिखे हुए थे जिसमें मुख्य रूप से आपणो मान आपणी मरीयादा, आपणों देश आपणी भासा, केसरिया बालम आवो नीं पधारों म्हारे देस, म्हारला टाबर धुण खावें बारला करे ऐस, राजस्थानी भासा ने दूजी राज भासा बणाओ मोटयार परिषद ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि बगैर केन्द्र सरकार की स्वीकृती के राजस्थानी मायड़ भाषा को राज भाषा घोषित करें। मोटयार परिषद से जुड़े लेागों का कहना है कि 1987 गोवा में गोवा दमन दीव राज भाषा द्वारा कोकड़ी भाषा को राज भाषा बनाया गया था उस समय कोकड़ी को केन्द्र सरकार से सवीधानीक मान्यता नहीं थी पर उसे केन्द्र सरकार ने पांच साल के बाद केन्द्रीय सरकार ने राज भाषा घोषित कर दी थी। इन लोगों का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य में छत्तीसगढ़ राज भाषा अधिनियम 2007 में छत्तीसगढ़ी भाषा को राज्य भाषा बनाया गया। केन्द्र सरकार ने अब तक उसे स्वी$कृति नहीं दी है परन्तु छत्तीसगढ़ में अपनी भाषा को राज भाषा अधिनियम लागू है। राजस्थान भाषा मायड़ को इसी तरह मंजूर क्यों नहीं करती।

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