देश की संस्कृति और परम्परा की रक्षा में संतों का भरपूर योगदान : योगी आदित्यनाथ

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बीकानेर। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी श्री आदित्यनाथजी ने शनिवार को यहां श्री नवलेश्वर मठ सिद्धपीठ में योगी श्री मत्स्येंद्रनाथजी, योगी श्री गुरु गोरक्षनाथजी व भगवान श्री आदित्यदेव की प्रतिमाओं के अनावरण के बाद कहा कि राजनैतिक एकता भले ही कमजोर हो, सांस्कृतिक एकता बरकरार रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्मस्थल उपासना के नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकात्मकता के भी स्थल है। योगी ने कहा कि प्रत्येक नागरिक के लिए धर्मस्थल खुले रहने चाहिए, यह आज के समय की जरुरत है। इस अवसर पर मंच पर उनके साथ योगी महासभा के महामंत्री चेताईनाथजी व उपाध्यक्ष योगी बालकनाथजी सहित केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल भी मौजूद रहे।

मठ के मठाधीश्वर योगी श्री शिवसत्यनाथजी महाराज के सान्निध्य में हुए इस कार्यक्रम में सभी का स्वागत मठ संतश्री योगी प्रहलादनाथजी ‘विज्ञानी ‘ ने किया। अपने अल्प समय के इस निजी कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने 37 मिनट के प्रभावी उद्बोधन में कहा कि प्रयत्न करने वालों की कभी हार नहीं होती है। उन्होंने मठ के मठाधीश्वर योगी शिवसत्यनाथजी व योगी प्रहलादनाथजी का जिक्र करते हुए कहा कि ‘इनकी साधना की शक्ति का परिणाम है कि हम यहां आज आ पाए हैं।’ योगी ने कहा कि भारत देश सनातन धर्म सिद्धियों से भरा पडा है। यहां के सिद्धों, शक्तिपीठों व दैवीय शक्तियों ने हर युग-कालखण्डों में चमत्कृत किया है। तत्वज्ञान को बढावा दिए जाने की हिमाकत करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नाथ संप्रदाय परंपरा ने भी समाज को नई दिशा देने में, लोककल्याण व धर्म के शाश्वत मूल्यों की रक्षा के लिए योगियों व संतों ने जीवन लगाया है। उन्होंने महापुरुषों के जीवन का उदाहरणीय बताया व कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन आदर्शमय रहा है।

प्रसंगवश वे बोले कि जनता शासन के सामने केवल मांगे ही नहीं रखे बल्कि समाधान में जनसहभागिता के रुप में आगे आए। उन्होंने उपस्थित विशाल जनसमूह के ‘जयश्री राम-जयश्री राम के उद्घोष के प्रत्युत्तर में कहा कि ‘वे जानते हैं कि राम के नाम पर आपकी क्या चाहत है, आपकी भावनाएं साकार रुप ले इसके लिए देशभर में प्रत्येक घर में छह नवंबर को एक दीपक राम नाम का जलना चाहिए, बहुत जल्दी ही काम भी होगा।’ कोई भी काम संकल्पित होगा तो तो वह साकार रुप भी लेगा, इसके लिए यह समय उचित है। अपने उद्बोधन में आदि शंकराचार्य व सरदार वल्लभभाई पटेल का भी जिक्र उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया। साथ ही जल संरक्षण, बहन-बेटियों की सुरक्षा व गायों की रक्षा के लिए तय मानकों के साथ युवाओं एवं सामाजिक भागीदारी की जरुरत को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि समाज को सिर्फ मांगना ही नहीं व्यवस्थाओं के अनुरुप सहयोग भी करना चाहिए।

योगी ने कहा कि जल एवं गौसंरक्षण देश के खेतों में सोना उपजाने में सार्थक है। योगी ने अगले वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार प्रयागराज कुंभ-2019 के भव्य एवं दिव्य रुप से आयोजित कर रहा है, उन्होंने इसमें सभी को आमंत्रित भी किया। उन्होंने हजारों वर्षों पुरानी परंपरा व सांस्कृतिक धरोहर प्रयागराज में किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी भी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पटल पर देश को गौरवान्वित किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि एक भारत-श्रेष्ठ भारत की हमारी परिकल्पना के अभियान में सभी की सहभागिता का आह्वान किया। इससे पूर्व योगी बालकनाथजी व केंद्रीयमंत्री अर्जुन मेघवाल ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए। मठाधीश्वर योगी श्री शिवसत्यनाथजी ने योगी गोरक्षनाथजी नशे के निषेध के नियम की जानकारी देते हुए नशे का नाश का कारण बताया। कार्यक्रम में योगी श्री प्रहलादनाथजी की आध्यात्मिक पुस्तक ‘संपूण हृदय स्तोत्र’ का लोकार्पण भी योगी सहित अनेक अतिथियों ने किया। अतिथियों का मठ की ओर से साफा पहनाकर, माल्यार्पण कर, चादर ओढाकर तथा मेमेंटो भेंट कर सत्कार किया गया। मठ के कर्मठ सदस्यों का सम्मान भी योगी ने अपने करकमलों से किया।

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